जगह-जगह खुल गए पर कुक्कर मुत्तो की तरह खुल गये विद्यालय,चिकित्सा विभाग बिना जांच किए दे रहे हैं।एनऒसी।
यूके समाचार 24
21अगस्त 2026
धीर सिंह
हरिद्वार। उत्तराखंड प्रदेश सरकार ने चिकित्सा विभाग द्वारा अलग-अलग कोर्स की मान्यता देने के लिए क्या मानक तैयार किए हैं। उनको देखते हुए जनपद हरिद्वार में हर 10 मीटर की दूरी पर बच्चों को बहला फुसलाकर कर उनके भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। और उनको डॉक्टर बनकर क्षेत्र में भेजने की तैयारी की जा रही है जबकि उनका ने तो किसी मेडिसिन के बारे में या किसी ट्रीटमेंट के बारे में विद्यालय में जानकारी नहीं दी जाती हालांकि कुछ विद्यालय तो ऐसे भी हैं जिनके प्रबंधक एवं प्रधानाध्यापक को यह भी मालूम नहीं है की किस डिग्री में उसको क्या ज्ञान सीखना चाहिए यह बच्चों के लिए एक श्राप जैसी विडंबना बनी हुई है।जीएनएम ,एएनएम, बी फार्मा, डी फार्मा आदि डिग्रियों को देने की बात कर रहे हैं ।लेकिन यह नहीं पता कि उनके पास भी उसे शिक्षित करने के लिए अध्यापक, एवं भवन है या नहीं है ।और भवन है तो जब अस्पताल का लाइसेंस दिया जाता है। तो वहां पर योग्य टीचर है या नहीं है। यह एक जांच का विषय है। जबकि अब क्षेत्र में संस्थाओं के नाम पर हॉस्पिटल चल रहे हैं ।और उन हॉस्पिटलों में किसी प्रकार की गुणवत्ता शामिल नहीं है कई बार एक दो हॉस्पिटल को अल्ट्रासाउंड का लाइसेंस न होने के कारण उनको नोटिस भी दिया गया है।परंतु बड़ी पहुंच के कारण उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता। हालांकि हम बात करें डिग्री धारी विद्यालयों की तो सरकार द्वारा उन विद्यालयों को छात्रों को एडमिशन कराने पर मजबूर किया जा रहा है। जिन विद्यालयों में ना तो कोई टीचर है और न ही कोई किसी किस्म की बच्चों के लिए सुविधा है। ऐसे में शिक्षा को महंगी कर कर प्राइवेट जेशन ले जाने से सरकार को बेनिफिट हो रहा है ।और सरकारी विद्यालय बंद होते जा रहे हैं यदि इस और उत्तराखंड सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो इसके परिणाम कुछ और ही देखने को मिलेंगे क्योंकि लगभग 10 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी की सरकार उत्तराखंड में विकास को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है लेकिन धरातल पर कुछ नहीं दिखाई दे रहा है ।और पढ़े-लिखे युवा बेरोजगार बेरोजगारी की तरफ हाथ बढ़ाते जा रहे हैं। और आने वाली जनरेशन अपनीzain zजनरेशन के आधार पर कैसे अपने आपको मजबूत करेंगे है। कि हमारा भविष्य कैसा होगा अब यह तो उत्तराखंड की सरकार ही बता पाएगी की उत्तराखंड में प्राइवेट स्कूलों को बंद कब किया जाए। क्योंकि आजकल के भौतिक माहौल को देखते हुए गरीब से गरीब व्यक्ति भी प्राइवेट स्कूल में अपने बच्चों को पढाने की कोशिश कर रहा है ।जबकि उन विद्यालयों में किसी भी किस्म का एजुकेटेड टीचर नहीं मिल पाता है ।और सरकारी विद्यालय में एजुकेटेड टीचर है जिनसे सवाल जवाब किया जा सकता है।अब देखना यह होगा की आने वाले टाइम में 2027 के चुनाव को लेकर उत्तराखंड सरकार इस पर क्या एक्शन लेती है या ठंडे बस्ते में डाल देती है
